डेयरी पशुओं को गर्मियों में “ लू ” से कैसे बचाएं ?

                मौसम और जलवायु दोनों कृषि एवं पशु उत्पादन को प्रभावित करते हैं। इनमे से कुछ प्रभाव, कुछ स्पष्ट और कुछ सूक्ष्म हैं पशु अपने वातावरण में होने वाले बदलावों के लिए सीधे और अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया देते हैं चरम मौसम और जलवायु के बदलाव के कारण पशु उत्पादन में जो समस्याए आती है वो सामन्य रूप से सभी पशुपालको को प्रभावित करती है। भारत एक गरम जलवायु वाला देश है जहा मौसम में कई बदलाव आते रहते है व इन बदलाव के कारण पशु की सामान्य शारीरिक एवं उत्पादन क्रियाओ पर प्रभाव होता है

ताप सहनशीलता – निम्न प्राकार के पशुओ के गर्मी के तनाव से ज्यादा प्रभावित होने की संभावना रहती है –

  • युवा जानवर ।
  • काले रंग के जानवर ।
  • जानवर जो बीमार हैं या जिनमे श्वसन रोग का पिछला इतिहास है।

गर्मी के तनाव की सहनशीलता भी प्रजातियों के मध्य और अंतः-प्रजाति भिन्न हो सकती है उदाहरण के लिए-

  • अन्य पशुओ की तुलना में सूअर पर गर्मी के तनाव का ज्यादा असर होने कि संभावना रहती है और इनकी त्वचा तेज धूप में जल्दी झुलस सकती है ।
  • ऐसी भेड़ जिनकी ऊन निकट समय में ही उतरवाई हो उन्हें तेज धूप की रोशनी से खतरा होता है।
  • उच्च उत्पादक डेयरी गाये, कम उत्पादक गायों की तुलना में चरम तापमान जलवायु से अधिक प्रभावित होती हैं।
  •  दुधारू गाये, सूखी गायो की तुलना में चरम तापमान जलवायु से अधिक प्रभावित होती हैं क्युकी दुग्ध उत्पादन हेतु इनमे अतिरिक्त मेटाबोलिक उष्मा का उत्पादन होता है ।
  • काले बालों वाले मवेशी, हल्के बाल वाले मवेशी की तुलना में चरम तापमान जलवायु से अधिक प्रभावित होती हैं होल्सटीयन गाये, जर्सी गायों की तुलना में गर्मी के लिए कम सहनशील होती हैं।
  •  450 किलोग्राम से अधिक भारी गौवंशीय पशु हल्के पशु की तुलना में चरम तापमान से होने वाले तनाव के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं।

उच्च तापमान के दिनों में गर्मी के तनाव के लक्षणों के लिए उपरोक्त प्रकार के जानवरों को अधिक ध्यान से देखा जाना चाहिए।

लू अथवा गर्मी के तनाव की पहचान- गर्मी के तनाव के कई संकेत हैं जिन्हें आप अपने पशुओं में देख सकते हैं। कुछ सामान्य संकेतों में शामिल हैं-

  • हाँफने ।
  • श्वसन दर में वृद्धि हुई ।
  • बढ़ा हुआ पानी का सेवन ।
  • भूख में कमी ।
  • उदासीनता / सुस्ती ।
  • लार उत्पादन में वृद्धि ।
  • गंभीर मामलों में पशु का निढाल हो जाना ।

इन चरम परिस्थितियों से सामाजस्य बैठाने हेतु यह आवश्यक है कि पशुपालक विभिन्न प्रजातियों के गर्मी के तनाव संकेतों से अच्छी तरह से परिचित हों और चरम तापमान के दिनों के दौरान अपने पशुओ को इन संकेतो के लिए ध्यान से देखें।

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लू अथवा गर्मी के तनाव का इलाज – यदि आपके पशु गर्मी के तनाव के संकेत दिखा रहे हैं तो उन्हें शांत करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकती हैं-

  • प्रभावित पशु को शीघ्रतम छाया-दार स्थान जहा यथासंभव शीतल पवन का प्रवाह हो ले जाएं, यदि जानवरों गंभीर मामले में चलने की स्थिति में नहीं है व निढाल हो चुका है तो, तो उन्हें उठाएं और उन्हें छायादार स्थान पर स्थानांतरित करें या जहां वे हैं उसी स्थान पर छाया प्रदान करें ।
  • प्रभावित पशु को शीतल पानी दे, परन्तु यह उन्हें थोड़ी थोड़ी मात्रा में पीने के लिए दे, बार बार उन्हें ठंडे पानी से स्प्रे करें, खासकर पैरों पर, या उन्हें पानी में खड़े करें। मवेशी, सूअर और घोड़ों के लिए स्प्रिंकलर का प्रयोग करें। उन पर गीले तौलिए रखे। शीतलन प्रक्रिया में सहायता करने के लिए यदि पवन प्रवाह ना हो तो कुक्कुट(जैसे मुर्गिया) को गीला नहीं किया जाना चाहिए ।
  • उनके चारों ओर वायु प्रवाह में वृद्धि करे । यह पंखो, वेंटिलेशन, या प्राकृतिक पवन प्रवाह के साथ किया जा सकता है ।
  • पशु आराम से लेट सके इसके लिए उसे पर्याप्त स्थान दे आवश्यक हो तो बाड़े में से कुछ पशुओ को कम कर स्टाकिंग घनत्व घटाए जिससे हवा का प्रवाह बना रहे ।
  • यदि पशु की स्थिति में सुधार का कोई संकेत नहीं दिखाता है तो सहायता के लिए अपने स्थानीय पशुचिकित्सक से संपर्क करें।

गर्मी के तनाव का पशुओ के उत्पादन और पशु कल्याण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है, कुछ मामूली प्रबंधन परिवर्तन करके और चरम तापमान की अवधि के दौरान अपने पशुओं की थोड़ी अतिरिक्त देखभाल करके, गर्मी के तनाव के प्रभावों को पर्याप्त सीमा तक कम किया जा सकता है।

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